मङ्गलबार, ०६ चैत २०७४, १३ : ३०

मधेसियों की मांग पूरी करने के लिए नेपाल में होगा संविधान संशोधन

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काठमांडू। नेपाल की तीन बड़ी पार्टियों ने देश के संविधान में संशोधन का फैसला लिया है। भारतीय मूल के मधेसियों की मांग पूरी करने के लिए अगले तीन माह के भीतर संविधान में संशोधन किया जाएगा। संविधान में की गई व्यवस्था से नाराज मधेसी समुदाय के प्रदर्शनकारी नेताओं के नहीं आने से त्रिपक्षीय वार्ता नहीं हो सकी।

सत्ताधारी सीपीएन-यूएमएल और यूसीपीएन-माओवादी के साथ ही मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बालुवतार स्थित प्रधानमंत्री के सरकारी आवास पर शुक्रवार को बैठक की। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष सुशील कोइराला और यूसीपीएन-माओवादी के नेता प्रचंड ने संविधान संशोधन विधेयक लाने पर सहमति जताई।

यह संशोधन संघीय इकाइयों के सीमांकन के मुद्दे का समाधान करने के लिए किया जाएगा। इसके अलावा प्रदर्शन कर रहे मधेसी समूहों की दो महत्वपूर्ण मांगें – आनुपातिक प्रतिनिधित्व और आबादी के आधार पर संसद में सीटों का बंटवारा भी पूर्व की नेपाली कांग्रेस सरकार द्वारा प्रस्तावित संविधान संशोधन में शामिल हैं।

मधेसी नेता आएंगे दिल्ली

मधेसी राजीनतिक दल रविवार को दिल्ली पहुंचेंगे। दिल्ली में मधेसी नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे। संघीय समाजवादी फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेंद्र यादव, तराई मधेस लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष महंत ठाकुर, सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र महतो और तराई मधेस सद्भावना पार्टी के महेंद्र यादव रविवार को दिल्ली रवाना होंगे।

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नेपाली कांग्रेस ने भारतीय मूल के मधेशी समुदाय की ओर से उठाए गए विवादित मुद्दों के हल के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर सरकार से चर्चा कराने की मांग की है। नेपाल का आरोप है कि मधेशियों ने भारत से लगती सभी सीमाओं पर नाकाबंदी कर रखी है।

संसद में मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस (एनसी) है। सत्ताधारी गठबंधन सहित चार राजनीतिक दलों के साथ हुई वार्ता के दौरान एनसी ने यह सुझाव दिया है। मधेशी आंदोलन पर विचार-विमर्श के लिए यह बैठक बुलाई गई थी।

बैठक के दौरान, एनसी नेताओं ने सत्ताधारी गठबंधन से संशोधित विधेयक और राष्ट्रीय पुनर्निर्माण प्राधिकरण को लेकर लाए गए बिल पर चर्चा शुरू कराने को कहा।

बैठक में उपस्थित नेपाली कांग्रेस के महासचिव प्रकाश मान सिंह ने कहा कि संशोधित विधेयक में सरकारी तंत्र में मधेशियों को उचित प्रतिनिधित्व देने और संसद में जनसंख्या के आधार पर सीटें आवंटित करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। सत्ताधारी गठबंधन में सीपीएन-यूएमएल, संयुक्त सीपीएन-माओवादी, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी-नेपाल और मधेशी जनाधिकार फोरम-डेमोक्रेटिक पार्टियां शामिल हैं।

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