मङ्गलबार, ०६ चैत २०७४, १३ : ३०

अब नेपाल चीनके भरोसे लायक नहीं रहा : संपदाकीय चीनी सरकारी अखबर ‘ग्लोबल टाइम्स’

नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की पहले यात्रा करने से नाराज है। इस नराजगी को उसने सरकारी अखबर ग्लोबल टाइम्स में संपदाकीय के जरिये जाहिर की है।

बीजिंग स्थित अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विश्वविद्यालय में भारतीय अध्ययन केंद्र के कार्यकारी निदेशक झू लियांग ने एक संपादकीय लिखी है। जिसे अखबार ने सोमवार को अपनी साइट पर प्रकाशित किया। उन्होंने लिखा कि चीनी और नेपाली आवाम ने एक बार फिर अपना भरोसा प्रचंड में जताया है, जिन्होंने इससे पहले भारत की सबसे पहले यात्रा करने की परंपरा तोड़ते हुए चीन से अपनी पहली विदेश शुरू कर सबसे हतप्रभ कर दिया था। हालांकि, आठ साल बाद अब प्रचंड अब उतने उग्र नहीं, जो पहले हुआ करते थे। अब वह राजनीतिक हित के अनुरूप व्यवहार कर रहे हैं।

लियांग ने लिखा, प्रचंड की भारतीय समकक्ष के साथ हुई बैठक के दौरान पंचमेश्वर परियोजना, भूकंप के बाद पुनर्निमाण और पूर्वी-पश्चिमी रेलवे निर्माण योजना पर चर्चा हुई, जबकि ये योजनाओं चीन के साथ संबंधों के केंद्र में है, जिसका फायदा नेपाल को हो सकता है। इस पृष्ठभूमि में लोग प्रचंड से पूछ रहे है कि क्या वह नई दिल्ली के साथ संबंधों की समीक्षा चाहते हैं या भारत द्वारा नियंत्रित नेपाल की स्थिति को बनाए रखना चाहते हैं।

लेख के मुताबिक, इससे लगता है कि नेपाल और चीन के संबंध बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। यही वजह है कि अप्रत्याशित रूप से चीनी नेताओं के नेपाल दौरे स्थगित हुए हैं। ऐसा लगता है कि चीन और नेपाल के संबंध अचानक कमजोर और संवेदनशील हो गए हैं। चीन अब मानता है कि नेपाल को बीजिंग की जरूरत तब होती है, जब उसे भारत पर दबाव बनाना होता है।

लियांग ने नाराजगी भरे लहजे में लिखा कि जैसे ही भारत का रुख काठमांडू के प्रति नरम होता है,वैसे ही नेपाली राजनीतिज्ञ चीन के साथ करार को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। ऐसे में उन्हें समझना चाहिए कि भारत से संतुलन स्थापित करने के लिए वे चीन को हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। उनकी अदूरदर्शिता चीन-नेपाल संबंधों पर नकारात्मक असर डाल रही है।

भारत पर निशाना
संपादकीय में भारत पर भी आरोप लगाए हैं। लियांग ने कहा कि चीन परिपक्व देश है और भारत-नेपाल संबंधों को प्रभवित नहीं करता, लेकिन इसके उलट नई दिल्ली चीन-नेपाल संबंधों में हसतक्षेप कर रहा है। ऐसे में अब नेपाल चीन के भरोसे लायक नहीं रहा।

http://www.globaltimes.cn/content/1007091.shtml

 

  • बीजिंग एजेंसियां

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